मारवाड़ राजघराने की बहियों में रोग जà¥à¤žà¤¾à¤¤ बही।
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Abstract
जोधपà¥à¤° राजघराने की जनानी डयोà¥à¥€ में निवास करने वाली रानियाà¤, माजियाà¤, पड़ढायतो और अनà¥à¤¯ महिलाओं की ततà¥à¤•à¤¾à¤²à¥€à¤¨ समय में सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सेवाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ थी तथा कैसे उनके असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होने पर नीम और वैध जी दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उनकी चिकितà¥à¤¸à¤¾ की जाती थी। परà¥à¤¦à¥‡ में रहने वाली रानियों के बीमार होने पर रानियों के महल में वैध जी सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ने जाकर परà¥à¤¦à¥‡ के माधà¥à¤¯à¤® से बात करके या रानी की डावड़ी के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताई बातों के आधार पर ही दवाई बनाकर देते थे। परà¥à¤¦à¤¾à¤¨à¤¶à¥€ रानियों के हाथों में धागा (सà¥à¤¤ का कचà¥à¤šà¤¾ धागा) बाधंकर दूसरे छोर पर उस धागे की कमà¥à¤ªà¤¨ के माधà¥à¤¯à¤® से नाडी को देखते और उसी अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ईलाज किया करते थे। इन राजघरानों की औरतों के कà¥à¤¯à¤¾ बिमारी होती थी तथा उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ दवाई दी जाती थी। इस बही से यह à¤à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¤ होता है कि महारानियों के ईलाज हेतॠवैध आया करता है। इस बही में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ जनाना महल में होने वाले कारà¥à¤¯à¥‹ की संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ रूपरेखा à¤à¥€ दरà¥à¤œ की जाती थी जो जनानी ढोà¥à¥€ की रिपोरà¥à¤Ÿ के नाम से जानी जाती है। यह रिपोरà¥à¤Ÿ नाजर व दोà¥à¥€à¤¦à¤¾à¤° के मारà¥à¤«à¤¤ लिखाई जाती थी। साथ ही इससे यह à¤à¥€ जानकारी मिलती है कि उस समय किस रानी को कà¥à¤¯à¤¾ बीमारी थी। बीमारी के ईलाज के लिठकौन से वैध को बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ जाता था। केवल बीमार होने पर नही अपितॠइन रानियों के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखते हà¥à¤ समय-समय इनका रेगà¥à¤²à¤° चैकअप किया जाता है। ईलाज के दौरान à¤à¥€ जनानी डयोà¥à¥€ के नियम- कायदे व सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ का पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाता था। इस बात का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाता था कि पधारे वैध उचित वेशà¤à¥‚षा व सर का ढककर आये। रानियों की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से पूरे ईलाज के दौरान नाजर वैध के साथ ही रहते थे।